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वसुधा को कुटुम्ब बनाने का समय अब आ गया है!
March 25, 2020 • डा. शरद प्रकाश पाण्डेय • विशेष

       

      डॉ जगदीश गाँधी

संस्थापक -प्रबंधक सिटी मोन्टेसरी  स्कूल, लखनऊ


(1) वसुधा को कुटुम्ब बनाने का समय अब आ गया है:-
हमारी संस्कृति की मूल शिक्षा भी सदैव से वसुधैव कुटुम्बकम् की रही है। अब सारी वसुधा को कुटुम्ब बनाने का समय आ गया है। आज विश्वव्यापी समस्याऐं जैसे - पर्यावरण प्रदुषण, अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवाद, विश्व युद्ध की तैयारियाँ आदि बढ़ती जा रही हैं। पण्डित नेहरू ने कहा था कि या विश्व एक हो जायेगा या नष्ट हो जायेगा। इस वसुधा को बचाने का एक ही उपाय है कि हम सब मिलकर अब इस वसुधा को दृढ़तापूर्वक पर्यन्त करके एक कुटुम्ब बनायें।
(2) परमात्मा की तरह ही हमारा ऊँचा चिन्तन होना चाहिए:-
आत्मा के पिता परमात्मा की तरह ही ऊँचा हमारा चिन्तन होना चाहिए। इस सृष्टि को सुन्दर बनाने का हर पल प्रयास करने का हमारा संकल्प होना चाहिए। एक प्रेरणादायी गीत की कुछ पंक्तियाँ इस प्रकार हैं - हम बदलेंगे सोच सभी की, हम बदलेंगे विचारों को। हम बदलेंगे हृदय सभी का, भर देंगे संस्कारों को। हर मानव का धर्म एक, वसुधैव कुटुम्ब हमारा है। जय जगत का नारा है, यह सारा विश्व हमारा है। विश्व शान्ति लायेंगे, यह संकल्प हमारा है। हमें जरूरत नहीं बमों की, हमें चाहिए प्यार अमन। प्रेम, एकता, अहिंसा से, भर देंगे सबका मन। परम पिता है एक, वही सबका सहारा है। जय जगत का नारा है, यह सारा विश्व हमारा है। विश्व शान्ति लायेंगे, यह संकल्प हमारा है। सभी देश अब एक बनेंगे, एक कानून बनायेंगे। कोई अस्त्र न शस्त्र बनायें, यह सबको समझायेंगे। मानवता के लिए जीएगे यही लक्ष्य हमारा है। जय जगत का नारा है, यह सारा विश्व हमारा है। विश्व शान्ति लायेंगे, यह संकल्प हमारा है।
(3) विश्व एकता का सपना इस युग का श्रेष्ठतम सपना है:-
महान उपलब्धियाँ हासिल करने के लिए हमें सिर्फ काम में ही नहीं जुटे रहना चाहिए, बल्कि परमात्मा द्वारा निर्मित इस समाज को बेहतर बनाने के सपने भी देखने चाहिए, सिर्फ योजनाएँ ही नहीं बनाते रहना चाहिए बल्कि विश्वास भी रखना चाहिए। कल उनका है जिन्हें अपने समाजोपयोगी सपनों के साकार होने का पूरा विश्वास है। महापुरूषों का कथन है कि मैं आपको स्वप्न देखने की चुनौती देता हूँ, मैं आपको कर्मठ बनने और मेरे साथ इस महानतम धरती को और अच्छा बनाने की चुनौती देता हूँ।
(4) विश्व एकता की शिक्षा इस युग की सबसे बड़ी आवश्यकता है:-
हम मिलकर प्रयास न करें तो सपने भी साकार नहीं होते हैं। अगर यदि विश्व का प्रत्येक व्यक्ति स्व-प्रेरणा से ओतप्रोत होकर विश्व एकता को स्थापित करने की जिम्मेदारी खुद ले लेता हैं, तो हमारे में विश्व एकता के सपने को साकार करने की क्षमता अपने आप विकसित हो जाएगी। हमें संसार में बेहतरी के रास्ते पर प्रति पल आगे चलने से भला कौन रोक सकता है? हमारा विश्वास है कि बच्चों की शिक्षा के द्वारा विश्व एकता का सपना खुली आंख से देखा इस युग का सबसे श्रेष्ठतम सपना है। निकट भविष्य में सभी के सहयोग से इसे विश्व संसद, विश्व सरकार तथा विश्व न्यायालय के गठन के रूप में सफल होना ही है।
(5) हमारे कदमों को प्रभु मार्ग पर चलने से भला कौन रोक सकता है?
आइये, हम प्रकृति की गति अपनाएं, उसका रहस्य है धीरज। अपना हाथ समाज सेवा के कार्यों को करने से आगे बढ़ाने से कभी मत हिचकिए तथा दूसरे का आगे बढ़ा हाथ थामने से भी कभी मत हिचकिए। घृणा के घाव बदसूरत होते हैं, और स्नेह के खूबसूरत। लोगों को उनकी भूल के लिए माफ कर देना उदारता है लेकिन उनके प्रति सुधारक की भूमिका निभाने की बात हमेशा याद रखे। हमें हो सकता है दूसरी ओर की घास अधिक हरी लगे, लेकिन अगर हम अपनी घास को पानी देने का समय निकालें तो यह भी उतनी ही हरी लगेगी। जीवन तूफान के चले जाने का इंतजार करने में नहीं, यह तो बरसात में भी भीगने का आनंद लेने में है।
(6) बच्चों का बाल्यावस्था से विश्वव्यापी दृष्टिकोण विकसित करना चाहिए:-
माता-पिता अपने बच्चों को धन दौलत नहीं, बल्कि अपने बच्चों में ज्ञान प्राप्ति की ललक जगाने वाला स्वस्थ वातावरण घर में दें। निष्ठा से काम करने वाले ही संसार में सबसे सुखी है। श्रेष्ठ व्यक्ति बोलने में संयमी होता है लेकिन अपने कार्यों में अग्रणी होता है। बीमारी की कडवाहट से व्यक्ति स्वास्थ्य की मधुरता समझ पाता है। अच्छी स्वस्थ हंसी और लम्बी नींद किसी भी मर्ज के लिए दो उत्तम इलाज हैं। स्वास्थ्य और बुद्धिमत्ता जीवन के दो आशीर्वाद हैं। हे प्रभु, मैं इस बार आपसे कुछ मांगूंगा नहीं, लेकिन जो सब कुछ मेरे पास है उसके लिए बस आपका आभार प्रकट करूँगा। आपकी गर्दन पर लिपटी आपके बच्चों की बाहों से कीमती जेवर आप कभी नहीं पा सकते। बेटी तो इस संसार में मिल सकने वाली सबसे खूबसूरत सौगातों में से है। बच्चों को स्वस्थ, शिक्षित और विश्वव्यापी दृष्टिकोण का इंसान बनाना ही मेरे लिए सबसे बड़ी सफलता हैं।
(7) हमारी आत्मा सबसे बड़ी शिक्षक है:-
बदलाव करने की हमारी इच्छा का ‘वैसे ही बने रहने की’ इच्छा से बड़ी होना जरूरी है। जब हम अपने मित्रों का चयन करते हैं तो व्यक्तित्व के स्थान पर चरित्र को प्रमुखता दें। हम ईश्वर को कहाँ पा सकते हैं अगर हम उसे अपने आप में, बच्चों में और अन्य जीवों में नहीं देखते? हमको अपने भीतर से ही विकास करना होता है। कोई हमको सिखा नहीं सकता, कोई हमको आध्यात्मिक नहीं बना सकता। हमको सिखाने वाला और कोई नहीं, सिर्फ हमारी आत्मा ही है।
(8) असफलता का डर ही सफलता के मार्ग में सबसे बड़ा रोड़ा है:-
एक महान नेता में अपनी दूरदर्शिता, अपने संकल्प तथा अपने सपने को पूरा करने की हिम्मत उत्कंठा से आती है, पद, धन तथा दर्जे से नहीं। असफलता का डर ही सफलता के मार्ग में सबसे बड़ा रोड़ा है। जीवन के बारे में ज्यादा व्यथित न हों, इससे हम बच कर निकलने वाले तो हैं नहीं। जीवन को गाड़ी के सामने के काँच से देखें, पीछे देखने के दर्पण में नहीं। जीवन के प्रति हमारा रूख ही जीवन के हमारे प्रति रूख का निर्धारण करता है। जीवन का महानतम उपयोग इसे किन्हीं ऐसे अच्छे कार्यों पर व्यय करना है जो कि जीवन के जाने के बाद भी बने रहें। कठिनाईयों का अर्थ आगे बढ़ना है, न कि हतोत्साहित होना, कठिनाइयाँ और विपतियाँ हमें और अधिक मजबूत और शक्तिशाली बनाती हैं।
(9) निष्ठा से काम करने वाले ही सबसे सुखी है:-
चाहे हमारे में कितनी भी योग्यता क्यों न हो, केवल एकाग्रचित होकर ही हम महान कार्य कर सकते हैं। अपने प्रत्येक दिन को सर्वोत्कृष्ट बनाएं। उत्कृष्टता की सिद्धि तब नहीं होती जब कुछ और जोड़ना या लगाना बाकी नहीं रह जाए, बल्कि तब होती है जब जोड़ने और लगाने के लिये कुछ बचा ही न हो। अपनी सामथ्र्य का पूर्ण विकास न करना दुनिया में सबसे बड़ा अपराध है, जब हम अपनी पूर्ण क्षमता के साथ कार्य निष्पादन करते हैं, तब हम दूसरों की सहायता करते हैं। हम अधिक ध्यान उस पर दें जो हमारे पास है, उस पर नहीं जो हमारे पास नहीं है।
(10) आइये, विश्व को प्यार, न्याय, सहयोग, सहकार तथा एकता के सूत्र में पिरोए:-
यदि इस लेख को पढ़कर कोई भी पाठक अपने मन में यह प्रतिज्ञा करता है कि मैं (1) उद्देश्यपूर्ण शिक्षा के द्वारा समाज के अन्धकार को मिटाने, (2) नफरत और आपसी दुःखों की अग्नि से जलती हुई मानवता को बचाने, (3) विश्व एकता एवं (4) विश्व शान्ति के लिए काम करते हुए विश्व को प्रेम, प्यार, सहयोग, सहकार तथा एकता के सूत्र में पिरोऊँगा तो मेरी लेखनी अपने उद्देश्य में सफल होगी और हमारा प्रयास सार्थक होगा।