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सिंचाई कर्मी वांछित सूचना नहीं दिए तो होंगे दण्डित
February 11, 2020 • डा. शरद प्रकाश पाण्डेय • सिंचाई
15 अप्रैल तक हरहाल में सिंचाई विभाग खाली करायें अपनी जमीन 
उत्तर प्रदेश के जलशक्ति मंत्री डा. महेन्द्र सिंह ने कल देर रात तक लगभग 03 घण्टे तक सिंचाई विभाग के कमाण्ड सेन्टर में सिल्ट सफाई, गड्ढा मुक्त, निर्माण से संबंधित परियोजनाओं की स्थिति, सिंचाई विभाग की जमीनो पर अवैध कब्जे तथा बाढ़ कार्यों की गहन समीक्षा करते हुए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिये कि सिंचाई विभाग की जमीनों तथा परिसम्पत्तियों पर किये गये अवैध कब्जों को अभियान चलाकर आगामी 15 अप्रैल तक हरहाल में खाली करायें। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि बाण सागर परियोजना तथा सरयू परियोजना के अवशेष कार्यों को आगामी जून तक पूरा कराया जाय। उन्होंने अधिकारियों को पूरी लगन और मन से कार्य करने की हिदायत देते हुए कहा कि विभाग की ऐसी छवि बनायें जो दूसरे विभागों के लिए उदाहरण बने। 
जलशक्ति मंत्री ने प्रदेश तथा जनता के हित में नहरों की जमीन पर किए गये अवैध कब्जों को अभियान चलाकर अतिक्रमण मुक्त करने के निर्देश देते हुए कहा कि 20 फरवरी तक जनपदवार अवैध कब्जों की सूची तैयार की जाए। इसके साथ ही 15 मार्च के बाद अवैध कब्जाधारकों को नोटिस देकर अप्रैल के पहले सप्ताह तक जमीनों को मुक्त कराया जाए। उन्होंने कहा कि जो जमीन प्रदेश के बाहर अन्य राज्यों- दिल्ली, मध्यप्रदेश, हरियाणा, राजस्थान तथा उत्तराखण्ड में स्थित है उसको खाली कराने की प्रक्रिया मई, जुन तक पूरी की जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सिंचाई विभाग की एक-एक इंच जमीन खाली करायी जायेगी। उन्होंने प्रमुख सचिव से कहा कि वांछित सूचना न देने वाले अभियन्ताओं के खिलाफ चेतावनी जारी करें। 
बैठक में बताया गया है कि मेरठ, मुजफ्फरनगर, बुलन्दशहर, गौतमबुद्धनगर, हरिद्वार, कानपुर आदि शहरों में सिंचाई विभाग की भूमि पर अवैध कब्जे किए गये हैं। उन्होंने संबंधित मुख्य अभियन्ताओं को निर्देश दिए कि इस मीटिंग से जाकर अपने अधीनस्थ अधिकारियों के साथ बैठक करके कार्ययोजना बनायें और जमीनों पर से कब्जा हटाने के बारे में कार्रवाई शुरू कर दें। जलशक्ति मंत्री ने जमीनों से कब्जा हटाने के लिए सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य, जिलाधिकारियों तथा मण्डलायुक्तों को पत्र भेजने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नहर की पटरी, सिंचाई विभाग के लैण्ड बैंक पहले खाली करायें जाएं। मध्य गंगा के मुख्य अभियन्ता श्री ए0के0 सेंगर ने बताया कि कानपुर में लगभग 33 हे0 जमीन पर अवैध कब्जे हैं। इस मामले में 195 लोगों पर एफआईआर दर्ज करते हुए विधिक सूचना उनके घरों पर चस्पा करा दी गई है। उन्होंने सिंचाई विभाग की सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही फोटोग्राफी तथा जियो टैगिंग के लिए भी हिदायत दी।
डा. महेन्द्र सिंह ने नहरों के माध्यम  से भरे जाने वाले तालाबों की सूची, तालाबों की नहरों से दूरी, तालाबों की संख्या, स्थिति, क्षेत्रफल तथा किस विभाग द्वारा बनाये गये हैं, उसका पूरा विवरण उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संबंधित अभियन्ता अपने क्षेत्र के चेक डैम का स्थलीय निरीक्षण करके उसके रखरखाव तथा मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी उपलब्ध करायें। उन्होंने ‘‘काडा’’ से संबंधित कार्यों को 15 मार्च से पहले शुरू करने तथा नहरों पर सोलर पैनल, पवन चक्की स्थापित करने के कार्य में गति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन को निर्देश दिए कि हर नहर पर सींचपाल और राजस्व अधिकारी मौजूद होने चाहिए। उन्होंने नहरों पर तैनात सिंचाई कर्मियों की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। डा. सिंह ने सिंचाई विभाग में आहरण वितरण में पारदर्शिता तथा समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए हर स्तर पर आनलाइन ट्रांजेक्शन की व्यवस्था किये जाने के लिए शीघ्र कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
सिल्ट सफाई की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि सिंचाई विभाग के इतिहास में पहली बार नहरों की सफाई में सराहनीय कार्य हुआ है, जिसकी प्रसंशा प्राक्कलन समिति ने भी किया है। उन्होंने कहा कि नहरों में पानी आने से किसानों को सिंचाई विभाग की कार्य प्रणाली पर और भरोसा कायम हुआ है। सिल्ट सफाई की सराहना में विभिन्न दलों के 300 विधायक, विधान परिषद सदस्य तथा सांसदों ने सराहना की। उन्होंने सिल्ट सफाई से निकाली गयी मिट्टी की नीलामी से प्राप्त की गयी धनराशि के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कुछ स्थानों पर मिट्टी का निस्तारण ठीक से न किये जाने पर अप्रशंन्नता व्यक्त करते हुए इस माह के अन्त तक ठोस कार्ययोजना बनाकर मिट्टी के निस्तारण किए जाने के निर्देश दिए।
डा. सिंह ने विभाग द्वारा नहरों में पानी छोड़ने तथा सिल्ट सफाई कार्यों के बारे में आम जनता के अनुभव तथा फीडबैक प्राप्त करने के भी निर्देश दिए। इसके साथ ही निर्माणाधीन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए कार्य की गति बढ़ाने पर जोर दिया। बैठक में बताया गया कि बहुत सारी परियोजनाएं निर्माण के अंतिम चरण में हैं और शीघ्र पूरी कर ली जायेंगी। इसके अलावा 05 से 50 करोड़ रुपये तक की 83 परियोजनाएं आगामी मार्च तक पूरी कर ली जायेंगी। उन्होंने गंगा यात्रा के सफल आयोजन के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारियों की सराहना करते हुए कहा कि वे अपनी कार्यशैली में बदलाव लायें और विभाग को नम्बर-1 बनाने के लिए पूरे मनोयोग से जुट जाएं।