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नर्सरी का रेखांकन और प्रबंधन
January 5, 2020 • डा. शरद प्रकाश पाण्डेय • कविता


फलदार व सजावटी पौधों की बागवानी पौधशाला (नर्सरी) स्थापित करने के लिये आवश्यक भूमि के चुनाव के उपरान्त उस भूमि में मातृ या पैतृक पौध निर्धारित स्थान पर लगाये जाने चाहिएद्य आमतौर पर जिस क्षेत्र में वह पौधशाला स्थित हो वहां आस-पास मांग के अनुसार उस प्रजाति या किस्मों के फलदार पौधों के मातृ या पैतृक पौधे लगाए जाने चाहिए। मातृ पौधों के प्रक्षेत्र का निर्धारण करने के लिए उपलब्ध भूमि का रेखांकन पहले ही तैयार कर लेना चाहिए, पौधशाला का रेखांकन करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए, जैसे-
1. बागवानी पौधशाला के उत्तर-पश्चिम दिशा में वायुरोधक पौधे लगाए जाने चाहिए, जो सर्दियों में पश्चिमी से आने वाली ठण्डी हवाओं से पौधों का बचाव हो सकें।
2. दक्षिण और पूर्व में ऐसे फलदार बीजू पौधे लगाएं जो तेज हवा को रोकने का कार्य करने के साथ बागवानी पौधशाला के लिए बीजू पौधों के बीजों की आवश्यकता की भी पूर्ति कर सकें।
3. पौधशाला के एक खंड में विभिन्न प्रकार के फलदार पौधों के क्षेत्र विशेष के लिए संस्तुत किस्मों के मातृ पौधों को लगाने का सुनिश्चित करें,यदि संभव हो तो मातृ खंड में कीट अवरोधक जाली लगाना भी सुनिश्चित करें।
4. दूसरे खंड (भाग) मे बीजू पौधे व कलमों की क्यारियों के लिए जगह निर्धारत करें, साथ साथ में कलम किए पौधों के लिए स्थान, स्टूलिंग आदि के लिए मातृ पौधों वाला स्थान भी पहले से निर्धारित करके उन पौधों की रोपाई करें, मुख्य रास्ते के दोनों तरफ आम, सेब, आंवला, बेलपत्र, फालसा, पपीता, गुंदा, अनार, अंजीर आदि फलदार पेड भी लगा सकते हैं।
5. बागवानी पौधशाला हेतु गमलाघर, ग्रीन हाऊस, पॉलीहाउस, विक्रय पटल और अन्य आवश्यक संरचना मुख्य सड़क के साथ बीच के स्थान पर बनाए जाने चाहिए।
6. पत्तियों व अन्य बेकार घास-फूस की कम्पोस्ट बनाने के लिए नर्सरी के उत्तर-पश्चिम कोने में खाद के गड्डे बनाने चाहिए, वर्तमान में केंचुआ पालन से उत्तम किस्म की खाद (वर्मी कम्पोस्ट) बनाई जा सकती है, जिससे सभी प्रकार के सड़ने वाले अवशेष को खाद में बदला जा सकता हैं
7. बागवानी पौधशाला में सिंचाई की उचित व्यवस्था हेतु जितना सम्भव हो भूमिगत पानी की पाइप लगाएं, और पौधों की कतारों में से पानी का स्थाई थाला न बनाएं
8. आधुनिक बागवानी पौधशाला में प्रो-ट्रे, प्लास्टिक क्रेट्स, मृदा रहित मिश्रण, मॉस घास, नैट हाऊस, पॉली हाऊस, कुहासा आदि को उचित स्थान अवश्य देना चाहिएं
आधुनिक पौधशाला की देखभाल
1. बागवानी पौधशाला (नर्सरी) में जो मातृ वृक्ष या अन्य पौधे लगे हो उन सभी को उचित खुराक, सड़ी गोबर की खाद और उर्वरक का समय-समय पर प्रयोग कर स्वस्थ बनायें रखेंद्य
2. भूमि में सूत्रकृमि और किसी कवक का प्रकोप हो तो धूमन (फ्युमिगेशन) द्वारा उनका नियन्त्रण करना चाहिएं।
3. मूलवृत्त के लिए, जो पौधे पौधशाला में उगाये गये हों, उनका स्थान बरसात में कम से कम दो बार परिवर्तित कर देना चाहिएद्य इस प्रक्रिया से मूसला जड़ों की वृद्धि रूक जाती है और अवस्थानिक जड़े अधिक निकलती हैद्य परिणाम स्वरूप रोपण से अधिक सफलता की सम्भावना होती है।
4. बागवानी पौधशाला में समयानुसार खरपतवार की रोकथाम करते रहना चाहिए।
5. सभी क्यारियों में मूलवृंत तथा प्रवर्धित पौधों के बारे में नाम पत्र लगा होना चाहिए, जिससे उनकी किस्म और आयु की जानकारी प्राप्त हो सके।
6. बागवानी पौधशाला में प्रवर्धन के बाद जब सभी पौधे पूर्ण रूप से चल जाए, तो इन्हें निकाल कर विक्रय करना चाहिए।
7. जिन फल वृक्षों में स्वयंबध्यता होती है, उनके साथ उचित अनुपात में परागणकर्ता किस्म के पौधे विस्तृत जानकारी के साथ ग्राहक को उपलब्ध कराये जाने चाहिए।
8. बागवानी पौधशाला में विभिन्न क्रियाओं के परिपालन हेतु चार्ट बना देना चाहिए और उसके अनुसार कार्य करते रहना चाहिए।