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लॉकडाऊन के दौरान सत्य जो सभी के सामने आए !
April 4, 2020 • डा. शरद प्रकाश पाण्डेय • विशेष

* आज अमेरिका अग्रणी देश नहीं है।
* चीन कभी विश्व कल्याण की नही सोच सकता।
* यूरोपीय उतने शिक्षित नहीं जितना उन्हें समझा जाता था।
* हम अपनी छुट्टियॉ बिना यूरोप या अमेरिका गये भी आनन्द के साथ बिता सकते हैं।
* भारतीयों की  रोग प्रतिरोधक क्षमता विश्व के लोगों से बहुत ज्यादा है।
* कोई पादरी, पुजारी, ग्रन्थी,मौलवी या ज्योतिषी एक भी रोगी को नहीं बचा सका।
* स्वास्थ्य कर्मी,पुलिस कर्मी, प्रशासन कर्मी ही असली हीरो हैं ना कि क्रिकेटर ,फिल्मी सितारे व फुटबाल प्लेयर ।
* बिना उपभोग के विश्व में सोना चॉदी व तेल का कोई महत्व नहीं।
* पहली बार पशु व परिन्दों को लगा कि यह संसार उनका भी है।
* तारे वास्तव में टिमटिमाते हैं यह विश्वास महानगरों  के बच्चों को पहली बार हुआ।
* विश्व के अधिकतर लोग अपना कार्य घर से भी कर सकते हैं।
*  हम और हमारी सन्तान बिना 'जंक फूड' के भी जिन्दा रह सकते है।
* एक साफ सुथरा व सवचछ जीवन जीना कोई कठिन कार्य नहीं है। 
* भोजन पकाना केवल स्त्रियां ही नहीं जानती।
* मीडिया केवल झूठ और बकवास का पुलन्दा है।
* अभिनेता केवल मनोरंजनकर्ता हैं जीवन में वास्तविक नायक नहीं।
* भारतीय नारी कि वजह से ही घर मंदिर बनता है।
* पैसे की कोई वैल्यू नही है क्योंकि आज दाल रोटी के अलावा क्या कर सकते हैं। 
* भारतीय अमीरों मे मानवता कुट-कुट कर भरीं हुईं है एक दो को छोड़कर। 
*  विकट समय को सही तरीक़े से भारतीय ही संभाल सकता है। 
* सामुहिक परिवार एकल परिवार से अच्छा होता है।
* आज भी गांव में अपना सामान्य घर शहर में करोङों के फ्लैट से ज्यादा सुरक्षित और शान्तिदायक है।