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गन्ना संस्थान की तकनीक अपनाकर किसानों ने 15,500 हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्रग्रहण कर लगभग 190 करोड़ रुपए का अतिरिक्त मुनाफा कमाया
February 16, 2020 • डा. शरद प्रकाश पाण्डेय • कृषि समाचार


 भाकृअनुप.भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थानए लखनऊ का 69वें स्थापना दिवस समारोह का आयोजन दिनाँक 16 फरवरीए 2020 को संस्थान परिसर में हुआ। इस अवसर पर भारतीय प्रबंधन संस्थानए लखनऊ की निदेशक प्रोण् अर्चना शुक्ला मुख्य अतिथि थीं। प्रोण् शुक्ला ने उदघाटन अवसर पर टीम  की भावना एवं नेतृत्व के विशेष संदर्भ में शोध संस्थानों में प्रबंधन मुद्देश् विषय पर व्याख्यान देते हुए संस्थान द्वारा गत 68 वर्षों में चीनी उद्योग में उल्लेखनीय योगदान के लिए बधाई देते हुए किसी मिशन को हासिल करने के लिए दल निर्माण एवं कुशल नेतृत्व के लिए तकनीकी कुशलताए अंतर.वैयक्तिक कुशलता तथा रणनीतिगत कुशलता जैसी योग्यताओं को आवश्यक बताया।  डॉण् सुशील सोलोमनए पूर्व कुलपतिए चन्द्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालयए कानपुर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के योगदान की सराहना की एवं पर्यावरण पर बगैर प्रतिकूल प्रभाव डाले गन्ने के सतत उत्पादन के लिए वैज्ञानिकों से शोध करने का आह्वान किया। उन्होने गन्ने का उत्पादन आवश्यकता से अधिक होने के कारण फसल नियोजनए पेट्रोल के साथ इथेनोल ब्लेंडिंगए खोई के आर्थिक एवं विविध उपयोगए किसानों की आय बढ़ाने के लिए गन्ने के साथ अन्य फसलों की सहफसली खेती तथा बिहार राज्य की तरह देश के अन्य राज्यों में भी वृहद स्तर पर गन्ने के प्रजनक बीज उत्पादन कार्यक्रम लेने एवं जलवायु परिवर्तन होने के कारण अजैविक एवं जैविक बाधकों का प्रबंधन करने के लिए उचित रणनीति बनाने पर ज़ोर दिया। 
 डॉ0 अश्विनी दत्त पाठकए निदेशकए भाकृअनुपद-भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान ने गत वर्ष 2019 में की संस्थान की उपलब्धियों एवं संस्थान के कार्य.कलापों का प्रस्तुतीकरण करते हुए बताया कि इस वर्ष संस्थान द्वारा विकसित कोलख 12207 एवं कोलख 12209 सीवीआरसी द्वारा व्यावसायिक खेती के लिए अनुमोदित की गई हैं तथा संस्थान ने फसल उत्पादनए सुरक्षा एवं गन्ने की खेती के यंत्रीकरण के लिए विभिन्न विकसित प्रद्योगिकी का भी उल्लेख किया। उन्होने संस्थान द्वारा गत वर्ष कई विश्वविद्यालयोए चीनी मिलोंए नैनो विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी संस्थानए चंडीगढ़  एवं इंडो.गल्फ फर्टिलाइजर्स की एक इकाई ग्रासिम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ साझा कार्यक्रम तथा व्यावसायिक उत्पादन के लिए किए गए समझौतों के बारे में उल्लेख किया। संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉण् एएकेण् साह ने बताया की गत वर्ष संस्थान के तीन तकनीकों का किसानों द्वारा 15,500 हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्रग्रहण द्वारा उनको लगभग 190 करोड़ रुपए का अतिरिक्त मुनाफा हुआ। 
 इस अवसर पर मुख्य अतिथि महोदया द्वारा संस्थान के सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक का पुरस्कारए डॉण् एएकेण् साहए प्रधान वैज्ञानिक  एवं सर्वश्रेष्ठ युवा वैज्ञानिक का पुरस्कार डॉण् लालन शर्माए वैज्ञानिक को प्रदान किया गया। विभिन्न श्रेणियों में संस्थान के अन्य 16 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी का प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह द्वारा एवं मृदाए जल एवं पादप विश्लेषण प्रयोगशाला के दल को भी उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। साथ ही तीन नवोन्मेषी किसानों श्री अवधेश वर्माए चंद्रशेखर तिवारी एवं मुकेश कुमार को खेती में उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। गत वर्ष संस्थान की उपलब्धियों एवं क्रिया.कलापों को समाहित करते हुए संस्थान का प्रकाशन श्इयर एट ए ग्लान्सश् एवं संस्थान की राजभाषा पत्रिका इक्षु सहित कई प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर उपस्थित किसानों को संस्थान द्वारा विकसित गन्ने की नवीनतम किस्म  कोलख 11206 के बीज भी वितरित किए गए । इस अवसर पर  आयोजित ओपेन प्लेटफॉर्म के अंतर्गत डॉण् टीण्केण् श्रीवास्तवए प्रधान वैज्ञानिकए फसल उत्पादन विभाग द्वारा जलवायु परिवर्तन के परिप्रेक्ष्य में जल संसाधनों के संरक्षण विषय पर व्याख्यान भी दिया गया। इस अवसर पर युवा वैज्ञानिकों एवं शोध सहायकों ने भी जल संरक्षण हेतु विशेष सुझाव दिये। सर्वश्रेष्ठ सुझावों को पुरस्कृत  भी किया गया। इस अवसर पर आयोजित किसान गोष्ठी में किसानों को गन्ने की उन्नत उत्पादन तकनीकी के बारे में जानकारी दी गई। डॉण् डीण् आरण् मालवीयए विभागाध्यक्ष ;फसल सुधार विभागद्ध ने धन्यवाद प्रस्ताव ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉण् अनीता सावनानी ने किया।