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गन्ना की नर्सरी में ग्रामीण महिला उद्यमियों का बढ़ा रूझान
October 9, 2020 • डा. शरद प्रकाश पाण्डेय • कृषि

प्रदेश के 36 गन्ना उत्पादक जिलों में सीडलिंग के वितरण हेतु तैयार की गयी नर्सरी के माध्यम से महिलाओं को बनाया जा रहा है आत्मनिर्भर

प्रदेश के 714 महिला स्वयं सहायता समूहों की 6,682 ग्रामीण महिला उद्यमियों को किया गया प्रशिक्षित

ग्रामीण महिला उद्यमियों द्वारा अब तक 31,30,151 सीडलिंग की स्थापना तथा 1.02 लाख गन्ना कृषकों को किया गया सीडलिंग का वितरण

लखनऊ: 06अक्टूबर, 2020

     प्रदेश के आयुक्त, गन्ना एवं चीनी श्री संजय आर0 भूसरेड्डी ने प्रदेश के विभिन्न गन्ना उत्पादक जनपदों की ग्रामीण महिला उद्यमियों को स्वावलंबी बनाने के लिए गन्ने की पौध तैयार करने का प्रशिक्षण देने हेतु अभियान चलाया है। इस अभियान के तहत प्रशिक्षितहोकर महिलाएं ग्रामीण स्तर पर सिंगल बड और बड चिप के माध्यम से गन्ने की नर्सरी तैयार कर पौध की बिक्री से आय अर्जन कर आत्म निर्भर बन रही है।

         इस सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी देते हुए गन्ना आयुक्त, श्री भूसरेड्डी ने बताया कि गन्ना बाहुल्य क्षेत्रों में रोजगार की अपार सम्भवनायें विद्यमान है, जिसके दृष्टिगत ग्रामीण महिलाओं को रोजगार देने हेतु स्वयं सहायता समूह तैयार कर उन्हें सिंगल बड एंव बड चिप के द्वारा गन्ने की नर्सरी तैयार किये जाने हेतु प्रशिक्षित एंव प्रोत्साहित किया जा रहा है।

      प्रदेश के 36 गन्ना उत्पादक जिलों में इस योजना के अन्तर्गत महिला उद्यमियों के स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। अब तक 714 महिला स्वयं सहायता समूहों की 6,682 ग्रामीण महिला उद्यमियों को सीडलिंग के वितरण हेतु नर्सरी तैयार करने के लिए गन्ना विभाग द्वारा 681 प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से प्रशिक्षित किया जा चुका है। ग्रामीण महिला उद्यमियों द्वारा अब तक 31,30,151 सीडलिंग की स्थापना की गई है, तथा 1,02,000 सीडलिंग का वितरण गन्ना कृषकों को किया जा चुका है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के प्रावधानों के अनुसार सीडलिंग उत्पादन हेतु रू0 1.50 रू0 प्रति सीडलिंग के अनुसार अनुदान देय है।

  गन्ना आयुक्त ने यह भी बताया कि गन्ने की खेती मे महिला रोजगार सृजन के माध्यम से रोजगार के विकल्प उपलब्ध होने के कारण महिला उद्यमियों का मनोबल बढ रहा है और आय के साथ ही उनके जीवन स्तर में वांछनीय सुधार आ रहा है।