ALL विशेष कविता सिंचाई समाचार कहानी पशुपालन कृषि बागवानी घाघ भण्डारी की कहावतें कृषि समाचार
आम के किसान बदलते मौसम में बौर की ऐसे करें  सुरक्षा 
March 8, 2020 • डा. शरद प्रकाश पाण्डेय • कविता

                                                     

                                                 शैलेंद्र राजन 
                                                  निदेशक
केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, लखनऊ 226101

हर साल बौर का मौसम आम किसान के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। इस दौरान किसानों के लिए मौसम और फसल की स्थिति पर आधारित सही सलाह महत्वपूर्ण है। साल के पहले चार महीनों के दौरान अधिकांश रसायनों का  छिड़काव किया जाता है| उचित  सलाह किसानों को अपने बागों में कीट और रोगों के परिदृश्य को समझने के लिए महत्वपूर्ण और मार्गदर्शक है। कीट और रोगों के प्रबंधन के लिए उचित उपायों का निर्णय किसान ज्यादातर अपनी अवधारणा के आधार पर करते है। अधिकांश किसान साथी किसानों को देखकर कीटनाशक का प्रयोग करते हैं भले ही उस समय छिड़काव की आवश्यकता न हो|  कई बार बहुत बड़ी संख्या में किसानों द्वारा देखा देखी गलत प्रयोग  जारी रखा जाता है। यदि वे सही नियंत्रण उपायों को अपना रहे हैं, परिणाम उत्कृष्ट होते हैं लेकिन कई बार किसानों को रसायनो का पर्याप्त ज्ञान नहीं होता है।

सामान्य तौर पर, किसानों को कीटनाशकों और कवकनाशी के अंतर के बारे में पता नहीं होता है। नतीजतन, जब एक कीट फसल पर हमला करता है तो वे कवकनाशी का छिड़काव करते हैं परिणामस्वरूप  कीट का प्रबंधन विफल होता हैं। उसी तरह, रोग भी अप्रबंधित रह जाते हैं क्योंकि वे कवकनाशी के स्थान पर कीटनाशकों का छिड़काव करते हैं। आमतौर पर रसायन प्रयोग से किसान को संतुष्टि मिलती है और खराब परिणाम उन्हें निराश करते हैं। कभी-कभी वे कई कीटनाशक और कवकनाशी को मिलाकर अपने कॉकटेल खुद बनाते हैं। वे छिड़काव  से पहले कई लोगों की सलाह पर आधारित मिश्रित रसायनों का प्रयोग करते हैं। कई बार असंगत रासायन, मिश्रण में  एक दूसरे के संपर्क मे आने पर अपनी प्रभावशीलता खो देते  है। बाजार में उपलब्ध कई कीटनाशक स्प्रे के लिए तकनीकी रूप से उपयुक्त नहीं हैं क्योंकि इनमें तुरंत परिणाम देने  वाले रसायन होते हैं लेकिन कीट में प्रतिरोध छमता को भी प्रेरित कर सकते हैं। किसानों को आम से मौसमी आय प्राप्त होती है और कई बार वे आशंकित रहते हैं कि अगर उन्होने  समय पर रसायन नहीं छिड़के तो वे अपनी पूरी फसल खो सकते हैं। डर की वजह से वे अनुचित समय पर गलत मात्रा में गैरवाजिब रसायनों को प्रयोग कर सकते हैं।

आईसीएआर-सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर, लखनऊ ने जैव-प्रौद्योगिकी विभाग, नई दिल्ली के समर्थन के साथ विकसित राष्ट्रीय मैंगो डेटाबेस पर एग्रो एडवाइजरी उपलब्ध  है। यह एग्रो एडवाइजरी http://mangifera.res.in/agro_advisory.php पर ऑनलाइन निशुल्क उपलब्ध है। डेटाबेस अन्य सूचनात्मक जानकारी के साथ आम पर ऑनलाइन साप्ताहिक एग्रो एडवाइज़री प्रदान करता है। साप्ताहिक मैंगो एग्रो एडवाइजरी में मौसम संबंधी पूर्वानुमान, आम की बीमारियों और कीटों का प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण, खादों और उर्वरकों का उपयोग, इंटरक्रॉपिंग आदि की जानकारी शामिल है। नेशनल मैंगो डेटाबेस आईसीएआर-सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर द्वारा जारी किए गए सभी एग्रो एडवाइजरी की मेजबानी करता है। हर हफ्ते में एक बार मंगलवार को इस सूचना को अपडेट किया जाता । डेटाबेस पर उपलब्ध सलाह भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा मौसम के पूर्वानुमान के आधार पर ICAR-CISH की बहु-विषयक टीम के परामर्श से तैयार की जाती है। सात दिन पूर्व का आईएमडी का पूर्वानुमान और अन्य सूचनाए आम किसानों एवं अन्य हितधारक के द्वारा उपयोग की जा रही हैं।

इन सलाहों  का उपयोग प्रगतिशील किसानों के साथ-साथ कृषि विस्तार अधिकारियों द्वारा भी किया जाता है। अब तक हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में आम डेटाबेस के माध्यम से उपलब्ध कराए गए आम पर कुल 391 कृषि सलाह दी जाती हैं। इस डेटाबेस से आम उपयोगी जानकारी को लाखों लोगों ने प्राप्त किया है ।